गणेश चतुर्थी गणेश जी के जन्म दिन की ख़ुशी में मनाया जाता हैं । इस बार में गणेश चतुर्थी 2020 में 22 अगस्त को मनाई जायेगी । इस दिन देश भर में बहुत ही बड़े स्तर पर बड़े – बड़े पूजा पंडाल सजा कर गणेश चतुर्थी को मनाते  हैं, लेकिन इस बार Covid 19 की वजह से लोग अपने घरों में ही गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करके पूजा का आनंद लेंगे ।

गणेश जी विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, प्रसिद्धि, रिद्धि और सिद्धि  के देवता हैं ।  गणेश जी को 108 नामो से जाना जाता हैं ।  गणेश जी को गणपति, लम्बोदर और विनायक के नाम से भी जाना जाता हैं ।

गणेश चतुर्थी
Ganesh Chaturthi

गणेश चतुर्थी का दिन सौभाग्य , ज्ञान और धरम का हैं , इस दिन लोग व्रत रखकर भगवान् को पूजा और  अर्चना से खुश करते हैं ।  मोदक और लड्डू  गणेश जी को बहुत पसंद हैं, इसलिए लोग इसका भोग लगा कर सच्चे मन से भगवान् को याद करते हैं ।  गणेश चतुर्थी भगवान् की भक्ति का दिन हैं । 10 दिन गणेश जी घर में रखकर फिर उन्हें जल में प्रवाह करने की प्रथा हैं। लोग इसेएक त्यौहार की तरह मनाते हैं , ढोल, नगाड़े, नृत्य, रंगो की होली खेलकर एक दूसरे को गणेश चतुर्थी की बधाई देते हैं । 

गणेश जी की कहानी

एक बार की बात हैं, माता पार्वती जी नहाने के लिए जाती हैं और गणेश जी को कहती है की तुम द्वार पे खड़े रहो और कोई भी आये तुम उसे अंदर मत आने देना ।  गणेश जी ने कहा -जी माता ।  तभी वहां अचानक शंकर भगवान् आ गए उन्होंने अंदर जाने को कहा   लेकिन गणेश जी ने मना कर दिया , शंकर भगवान् ने क्रोध में अगर गणेश जी का सिर काट दिया ।  जब पार्वती जी ने ये देखा तो वह बहुत दुखी होकर विलाप करने लगी,  पार्वती जी के इस दुःख को देखकर शंकर जी अपने गणों को नगर से एक  सिर लाने के लिए भेज दिया और वह लोग एक शिशु हाथी का सिर ले आये और उस सिर को भगवान् ने गणेश जी सिर पे लगा दिया और उसी  दिन गणेश जी का नामकरण हुआ ।

एक दिन शंकर भगवान् ने अपने दोनों बेटों (गणेश जी और कार्तिकेय ) से  कहा की जो इस पृथ्वी के चक्कर पहले लगा कर आएगा उसी की पूजा संसार में सबसे पहले की जाएंगी ।  फिर क्या था कार्तिकेय भगवान् अपने गरुण सवारी पर बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाने लगे और गणेश जी की सवारी तो मूषक हैं , अब गणेश जी ने सोचा की, क्या किया जाए उन्होंने थोड़ी देर सोचकर आपने माता और पिता के चक्कर लगाने लगे, भगवान् ने पूछा बेटा मैंने तो तुम्हे पृथ्वी के चक्कर लगाने को कहा हैं तब गणेश जी ने बड़ी विनम्रता से कहा पिता जी और माता जी मेरे लिए आप ही सब कुछ है और मेरे लिए तो आप ही सबसे सर्वोपरि है ।  गणेश जी ने अपने बुद्धि और विवेक से शंकर भगवान् का मन जीत लिया और उसी दिन से शंकर भगवान् ने उन्हें यह वरदान दिया की संसार में तुम्हारी पूजा सबसे पहले होगी और तुम्हारी पूजा के बिना कोई भी पूजा पूरी नहीं होगी । 

और ना जाने गणेश जी के बारे में कितनी बातें हैं जिनको जानकार और सुनकर आप धन्य हो जाएंगे ।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया

इस जयकारे के पीछे एक कहानी हैं कहते हैं 15वी शताब्दी में मोरया गोसावी का जनम महाराष्ट्र से २१ किलोमीटर दूर चिंचवाड़ गांव में हुआ जो की आगे चलकर एक महान संत बने और गणेश जी भक्त हुए।  मान्यता तो यह भी है की मोरया गोसावी जी का जनम भगवान् के आशीर्वाद के द्वारा ही हुआ । कहा तो यही भी जाता हैं की भगवान् ने उन्हें सपने में आकर नहीं में उनकी मूर्ति मिलेगी इस बात की भी जानकारी दी ।  तभी से गणेश चतुर्थी को धूम धाम और पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता हैं।

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

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