एक बच्चा जो कल देश का अनुशासित नागरिक बनेगा । How To Discipline A Child वह बच्चा जिसे जीवन में क्या अच्छा हैं और क्या बुरा , क्या गलत है और क्या सही ,  जो की एक कच्ची मिट्टी के बर्तन के समान हैं , उसकी सही से देखभाल करना माँ- बाप की  जिम्मेदारी हैं ।  आपने बहुत से माता और पिता को कहते सुना होगा की मेरा बच्चा मेरी बात नहीं सुनता या बहुत शैतान हैं , बत्तमीज़ हैं , जवाब देता हैं , चीजों को फेंक देता हैं या फिर कोई भी शैतानी ।  पर ये चीजे आपके बच्चे में कहा से , कैसे और कब आयी क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया । 

जब आपके बच्चें ने पहली बार कोई भी शैतानी की तो क्या आपने उसे डांटा या समझाया ।  क्या आपने उसे प्यार से बैठकर उसके साथ बात की , क्या आपने अपने बच्चें को दुबारा वह गलती ना करने के लिए बताया या कहा , ऐसे ना जाने कितनी बातें हैं जिसका जवाब आपके पास हैं ।  अगर एक माँ और बाप के रूप में आप अपने बच्चें को हैंडल नहीं कर पा रहे है तो दुनिया में कोई भी आपके बच्चें को अनुशासन नहीं सीखा सकता हैं ।  ये बात थोड़ी कडुवी हैं लेकिन सच भी हैं की बच्चें अपने घर से ही अच्छा या बुरा सीखते हैं ।  एक अच्छी परवरिश करना कोई आसान काम नहीं हैं , इसमें माँ और बात अपना सब कुछ लगा देते हैं । आज ये बहुत बड़ा सवाल हैं की एक बच्चे को कैसे अनुशासित किया जाए।हर बच्चें की परवरिश एक जैसे नहीं होती हैं इसलिए उनका व्वयहार, आचरण और संस्कार सब कुछ अलग- अलग होते हैं । 

How To Discipline A Child

एक बच्चें को अनुशासित करने के तरीके

अब मैं आपको वह बातें बताउंगी जिसे करने से आप अपने बच्चें को एक अच्छी शिक्षा और अनुशासित जीवन दें पाएंगे ।

बच्चें के लिए उसके माँ और बाप आदर्श होते हैं

एक बच्चा जो अपने माँ – बाप की छवि को दुनिया के सामने रखता हैं । लोग देखकर बोलते हैं की फलाने का बेटा या बेटी हैं या तो उसके नैन नक्श से और उसके उठने, चलने, बैठने और बोलने के तरीके से । एक बच्चें के सर्वांगिण विकास के लिए माँ – बाप की सबसे अहम् भूमिका होती हैं । आप माँ – बाप होने के नाते ऐसा कोई काम ना करें जो आप अपने बच्चें में नहीं देखना चाहते हो । हर माँ – बाप अपने बच्चें को अच्छी परवरिश देना चाहता हैं लेकिन इसके लिए माँ – बाप को भी अपने जीवन को उसी अनुसार ढालना पड़ेगा । मैं आपके एक उदहारण के द्वारा समझाने का प्रयास कर रही हूँ जैसे अगर आप को शराब पीने की आदत हैं और आप सोचे की आपका बच्चा उस आदत को ना अपनाये तो इसके लिए पहले आपको अपने आप को इस आदत से दूर रखना हैं, क्योंकि बच्चा जो अपने आस – पास देखता वही अनुसरण करता हैं । बच्चा अपने घर अपने मम्मी पापा और घर में रहने वाले सभी लोगो से कुछ ना कुछ अच्छी और बुरी आदतों का अनुशरण करता हैं । ये आपकी जिम्मेदारी हैं की आप अपने बच्चें को समय – समय पर अच्छे और बुरे का फर्क बताये ।

बच्चें के सामने माँ – बाप झगड़ा ना करें

एक बच्चें का मन बहुत की कोमल होता हैं अगर वह बचपन से अपने मम्मी और पापा को लड़ाई , झगड़ा, मार पीट और गालो गलौज को करते देखता या सुनता हैं तो ऐसे बच्चों का मन कुंठित हो जाता हैं और उनकी जीवन के प्रति सोच नकारात्मक होती चली जाती हैं । ऐसे माहौल में पलें हुए बच्चें जीवन में बुरे कामो की तरफ जल्दी आकर्षित हो जाते हैं । एक बच्चा जिसने जीवन में कभी ख़ुशी का मौहाल नहीं देखा तो वह अपने जीवन को और अपने परिवार को कैसे खुशिया दें सकता हैं । इसलिए बच्चों के सामने कुछ भी बोलने से पहले एक बार जरूर सोचे । बच्चों को बच्चों की तरह ही डील करें ना की बड़ों की तरह ।

झूठ बोलने के लिए कभी प्रोत्साहित ना करें

अक्सर हम अपने बच्चों से कह देते हैं की कोई पूछे तो कह देना पापा या मम्मी घर पर नहीं हैं , इससे हम अपने बच्चें को झूठ का सहारा लेना सीखा रहे हैं । फिर क्या जब बच्चें को जरुरत होगी तो वह भी झूठ बोलकर अपनी बात को आपके सामने रख देगा । इसलिए बच्चों को कभी अपने झूठ में शामिल ना करें, उन्हें झूठ बोलना ना सिखाये , यही छोटे – छोटे झूठ जिन पर आज आप हंस रहे है की देखो, अरे वाह ! बच्चें ने कितनी चालाकी से अपनी झूठ बोल दिया और आप अपने बच्चें को शाबाशी भी दें रहे है तो जाने – अनजाने में आप अपने बच्चें को वह रास्ता दिखा दिखा देते हैं जिस पर आप अपने बच्चे को कभी चलाना नहीं चाहते हैं । झूठ तो झूठ है वह कभी सच नहीं बन सकता हैं । झूठ छोटा हो या बड़ा झूठ ही रहेगा । इसलिए कोशिश करें बिना झूठ बोले बच्चें को जीवन में आगे बढ़ना सिखाये ।
ये भी ना सोचे की सब झूठ बोल रहे हैं तो हमे भी बोलना चाहिए । सब अपने – अपने कर्मो के अनुसार सुख या दुःख को भोगते हैं । अपना कर्म और अपना भाग्य अपने अनुसार बनाये । झूठ थोड़ी देर के लिए आपको उस समस्या से बचा सकता हैं लेकिन सच बोलने से आप आंतरिक रूप से खुश रहेंगे ।

अगर कोई गलती करें तो उसे अकेले में समझाये

बच्चें कोई गलती ना करें ऐसा तो संभव नहीं हैं । बच्चें शैतानी करेंगे, आपको परेशान करेंगे, हो सकता कोई ऐसा कार्य भी कर दें जो गलत हो, पर आपको एक बात हमेशा ध्यान रखना हैं की बच्चों को मारे नहीं बल्कि उनके साथ बैठकर ठन्डे दिमाग से उनको समझाए । क्या गलत हैं क्या सही है ये बताये । किये गए काम के क्या बुरे परिणाम हो सकते हैं ये बताये ।

बच्चें के सामने पैसे की कोई बात ना करें

बच्चें के सामने ज्यादा पैसे रुपये की बातें ना करें । क्योंकि बचपन से पैसे रुपये के चक्कर में पड़ कर बच्चें का मन पढ़ाई लिखाई में हट सकता हैं । उसे उसके goal में फोकस करने के लिए बोले ।

बच्चें को बचपन से सबका आदर करना सिखाये

बचपन से बच्चों में आदर भाव भरे । उन्हें बताये बड़ों के साथ कैसे बात करनी हैं, कैसे व्यवहार करना हैं । कुछ लोग छोटे बच्चों से हसकर कहेंगे बेटा मम्मा को मारो, भाई को मारो , और उन्हें ऐसा करने में बहुत आनंद आता हैं पर उन्हें पता नहीं जब यही सारी चीजे बच्चा बड़ा होकर करेगा तो उन्हें समाज में कितनी शर्मिन्दगी का सामना करना पड़ेगा । बच्चों के जीवन के नींव तो सबसे पहले घर से ही पड़ती हैं जिसका मिस्त्री और कोई नहीं हैं स्वयं माँ – बाप हैं ।

बच्चें को बचपन से ही अनुशासन के फायदे बताये

अपने बच्चों को अपनी सफलता के बारे में बताये अपने बचपन की कहानी सुनाये । बच्चों को बताये की अगर वह जीवन में अनुशासित होंगे तो वह दुनिया के सफल इंसानो में से एक होंगे । बचपन का प्रभाव ता उम्र रहता हैं इसलिए माँ – बाप द्वारा कही गयी और समझायी गयी बातें जीवन भर बच्चा नहीं भूलता हैं । अपने बच्चें को सुबह जल्दी उठने के फायदे, शिक्षित होने के फायदे और नियमित होने के फायदे बताये । बच्चों के अंदर बचपन से आत्म विश्वास बढ़ाये, उनके छोटे – छोटे कार्यों पर प्रोत्साहित करें और गलती करने पर समझाए ।

बच्चें को अपना goal decide करने के लिए बोले

बच्चें को बचपन से उसके goal set करवाए । आप क्या बनोगे, आपके क्या प्लान हैं जीवन को लेकर , इस तरह से पूछे और उनका सही मार्गदर्शन भी करें । एक बच्चें के लिए माँ – बाप पहले शिक्षक होते हैं ।

बच्चें को पर्याप्त खेलने दें

शरीर को स्वस्थ रखने और बच्चें के भरपूर मानसिक और शारीरिक विकास के लिए खेलना अति आवश्यक हैं । दिन में थोड़ा सा खेलने के समय जरूर दें क्योंकि बच्चों को खेलना सबसे ज्यादा पसंद होता हैं जब वो अपनी पसंद का काम कर लेंगे तो उसके बाद वह अन्य कामो में अच्छे से मन लगा पाएंगे । बच्चों की दिन चर्या में किसी भी एक खेल को शामिल करें , अपने बच्चें से पूछे वह कौन सा खेल खेलना चाहता हैं । क्या पता आपका बच्चा खेल जगत में ही आपका नाम रोशन कर दें , इसलिए खेल के प्रति अपनी सोच सकारात्मक रखे ये भाव ना रखे की जो बच्चें खेलते हैं वह पढ़ते नहीं हैं , ऐसा मानना बिलकुल गलत हैं ।

बच्चें के साथ समय बिताये और उसकी बातें सुने

आप कितना भी बिजी क्यों ना हो पर अपने बच्चें से बात जरूर करें, उसके साथ समय बिताये, अपने हर पल को यादगार बनाये क्योकि इस समय को भी आप चाह कर भी रोक नहीं सकते हैं । बचपन सबसे अच्छा समय जो कभी लौट कर नहीं आएगा इसलिए अपने बच्चों के साथ अपने बचपन को जिए । बचपन को ख़तम ना करें बल्कि उस पल में जिए ।

अच्छा काम करने पर गिफ्ट और प्राइज दें

जब बच्चा गलती करता हैं तो आप उसे डाटें पर उसी प्रकार जब वह कुछ अच्छा काम करें तो उस गिफ्ट या प्राइज देकर प्रोत्साहित करे । जैसे एग्जाम में अच्छे अंक लाना , राइम कम्पटीशन में फर्स्ट या सेकंड आना , स्कूल भाषण प्रतियोगिता में प्रथम आना इत्यादि ।

किसी के सामने ना डाटें और ना ही मारें

बच्चा जब भी कोई गलती करें तो कभी भी उसको सबके सामने ना डाटें बल्कि अकेले में उसे समझाए । सबके सामने बच्चें को डांटने से बच्चा आपको ही गलत समझने लगेगा और आपकी इज्जत भी नहीं करेगा ।

अपने बच्चों को स्वयं जज करे

किसी के द्वारा आपके बच्चें की शिकायत पर बिना अपने बच्चें की बात सुने कोई निर्णय ना ले ऐसे में दोनों पक्षों को बैठाकर ही बात करें यदि ऐसा पॉसिबल नहीं हैं तो अपने बच्चें से पूरी बात सुनकर और समझकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचे । बच्चें तो बच्चें ही हैं उनकी हर बात को सही भी ना माने और हर बात को झूठ भी नहीं , आप अपने विवेक और बुद्धि के साथ ही निर्णय ले ।

बच्चों की बातों और उनके द्वारा किये गए कार्यो को अनदेखा ना करें

अपने बच्चों के कार्यों का समय – समय पर मूल्यांकन करते रहें , देखते रहे क्या कर रहे हैं , कैसे हैं , क्या चल रहा हैं उसकी जिंदगी में । समय समय पर उन्हें गाइड करें । बच्चों को बड़ा ना समझे और उन्हें छोड़ ना दें बल्कि समय – समय पर उनका मार्गदर्शन करते रहे । क्योंकि बच्चों को माँ – बाप के पैसे नहीं चाहिए होते हैं पर उनके मार्गदर्शन की जरुरत सारी उम्र रहती हैं ।

बच्चें को मानसिक रूप से मजबूत बनाये

बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने से तात्पर्य यह हैं की आप उसे शिक्षित बनाये , शिक्षा ही एक ऐसा साधन हैं जिसके होने पर इंसान मानसिक रूप से अच्छा महसूस करता हैं । एक पढ़ा – लिखा इंसान जीवन में हर परिस्थित में , हर समस्या से अपने आप को बाहर निकाल लेगा । अपने बच्चें को शिक्षित स्किलफुल जरूर बनाये ।

निष्कर्ष

आपके बच्चें का उज्जवल भविष्य आपके हाथों में हैं और उन्हें आपकी हमेशा जरुरत हैं । बहुत सारे माँ- बाप ये सोचते हैं बच्चें बड़े जो जाएंगे फिर उन्हें हमारी जरुरत नहीं । ऐसा बिलकुल भी नहीं आपके बच्चें तो आपके लिए हमेशा बच्चें ही रहेंगे और उन्हें सदा ही आपका साथ और अहसास चाहिए इसलिए बच्चों का साथ दें और खुश रहे ।

बच्चो को सिखाओ कैसे सोचना हैं ना की क्या सोचा नहीं।

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