रिश्तों में एक रिश्ता हैं friends का रिश्ता , ये इतना खूबसूरत रिश्ता हैं जिसकी कहानी सबसे अलग होती हैं। Why friends are important, आज इसी के बारे में अपने विचारों के माध्यम से आपको समझाने की कोशिश करुँगी।

Freinds जिंदगी के हर फेज में बनते हैं, Childhood Freinds, School Freinds and College Freinds, ये तीनो में Childhood Freinds सबसे ज्यादा याद आते हैं क्योंकि बचपन में की गयी दोस्ती बिना मतलब के होती हैं, ना कुछ पाने की इच्छा और ना कुछ खोने का डर , बस साफ़ मन से एक दूसरे के लिए freindship को फील करना।

आप चाहे जिस उम्र में ही क्यों ना हो, एक अच्छे Freind की जरुरत तो सभी को होती हैं , वो कहते हैं ना, की ज्यादा दोस्त भले ही ना हो पर कुछ ऐसे Freinds जरूर होने चाहिए जिनसे आप अपना सुख -दुःख दोनों बाँट सके।

लेकिन हर Freind अच्छा हो ये जरुरी नहीं हैं , इसलिए Freinds भी सोच समझकर बनाये क्योंकि आपके Freinds की लाइफस्टाइल का असर आपकी जिंदगी भी पड़ सकता हैं, इसलिए जल्दबाजी में ना ही Freinds बनाये और ना ही कोई भी रिश्ता बनाये।

आज जहा एक तरफ हर किसी को Freinds की इतनी जरुरत हैं वही दूसरी और कुछ लोग दोस्ती में धोखा खाने के बाद नए Freinds बनाने में भी डरने लगते हैं, जो की ठीक नहीं है, दुनिया में हर कोई एक जैसा नहीं हैं, सब अच्छे नहीं हैं, तो सब ख़राब भी नहीं हैं।

बदलाव ही जीवन हैं, जरुरी नहीं है, की एक रिश्ता नहीं चला तो दूसरा भी नहीं चलेगा।

Why friends are important
Why friends are important

Freinds बनाने से पहले रखे कुछ बातों का ध्यान

आजकल लोग किसी को भी पहली बार में ही डिअर फ्रेंड कह देते है, और अगले ही पल उसी की बुराई भी करते हैं। मुझे समझ में नहीं आता हैं की इतनी क्या जल्दी है दोस्ती करने की , इसलिए थोड़ा सोचो , समझो, अपने दिल की सुनो , जब आपको लगे की सामने वाला आपका Freind बन सकता तब आप दोस्ती का पहला कदम बढ़ाये।

आज कौन किसका Freind हैं ये समझना मुश्किल हैं। पार्टी में तो ऐसे डांस और सेल्फी लेंगे की आप भी कंफ्यूज हो जाएंगे की ये क्या हो रहा हैं , और जब बाद में अकेले में बात होगी तो सीन ही कुछ और होगा।

दोस्ती को खेल ना बनाये क्योंकि शायद आप किसी को यूज कर रहे हो पर सामने वाले की फीलिंग आपके लिए इतनी स्ट्रांग हो सकती हैं की वह खुद तो परेशान होगा ही और समय आने पर आपको भी परेशान कर देगा।

रिश्ता दिमाग से बनाये पर उसे निभाए दिल से और लाइफ में जब भी फ्रेंड्स बनाये तो कुछ बातों को अपने दिमाग में रखे।

कोई काम निकालने के लिए Freinds ना बनाये

Freinds बनाने से पहले पूरी तरह से सोच और समझ ले की आपको किसी को Freind बनाना है या नहीं। आपका Freind आपके काम आएगा इस सोच से कभी भी Freinds ना बनाये। Freinds एक दूसरे के काम आये बहुत अच्छी बात है, पर लाइफ में कभी -कभी ऐसे उतार -चढाव आते हैं की आप चाह कर भी किसी की मदद नहीं कर पाते हैं, इसलिए किसी एक बात के पूरा ना होने पर ही अपनी सालों की दोस्ती को जज कर लेना ठीक नहीं हैं।

रिश्ते की बारीकियों को समझे , जरुरी नहीं है की आपका दोस्त आपके लिए हर समय अवेलेबल हो। दोस्ती एक आंतरिक ख़ुशी है, जिसे आप feel कर सकते हैं।

आजकल ज्यादातर लोग दोस्ती को काम से जोड़ लेते हैं, की उसने मेरा ये काम नहीं किया तो मैं अब उससे दोस्ती नहीं रखूंगी, क्या कभी आपने ये सोचने की कोशिश की कि आपके दोस्त ने ऐसा क्यों किया , वह क्या परिस्थितिया थी जिसके तहत उसे ये निर्णय लेना पड़े इसलिए हमेशा दोनों तरफ से सोचे, सिर्फ अपने आप को ठीक दिखा देना और सारी गलती दूसरे पर डाल देना भी ठीक नहीं हैं।

किसी भी रिश्ते को चलाने की जिम्मेदारी दोनों पक्षों की बराबर की होती हैं, पर कभी – कभी कोई एक पक्ष कमजोर होता हैं जिसकी वजह से भी दोस्ती टूट जाती हैं , कहने का मतलब हैं जिस तरह से सोच कर रिश्ता जोड़ा था , उसी तरह सोच समझ कर ही रिश्ता तोड़े, क्योंकि एक बार जो टूट गया उसे फिर जोड़ पाना मुमकिन नहीं हैं।

अपने स्टैण्डर्ड के हिसाब से Freinds बनाये

ज्यादा शो बाजी में ना रहे, आपका जो स्टैण्डर्ड हैं उसी के हिसाब से दोस्त बनाये। अगर आपने अपने स्टैण्डर्ड से ज्यादा हाई – फाई दोस्त बनाये या कम स्टैण्डर्ड में दोस्त बनाये तो ऐसे में ना ही आप adjust हो पाएंगे और ना ही सामने वाला adjust हो पायेगा। जैसे यदि आपका दोस्त बहुत ज्यादा पैसे वाला है तब भी आपको उसके सामने हमेशा कम ही लगेगा और यदि वह आपसे बहुत कम पैसे वाला हैं तो भी comfortable नहीं हो पाएंगे , इसलिए कोई भी रिश्ता हो बराबरी में रखे।

कभी -कभी ये भी आपको fee हो सकता हैं की सामने वाला अपने पैसे का दिखावा कर रहा हैं , बल्कि ऐसा नहीं होता है जिसके पास पैसा होगा तो कही ना कही वह व्यक्ति पैसे की बात करेगा ही, पर वह ये सब अनजाने में ही करता हैं।

जिसके पास जो होता हैं वो उसके बारे में तो बात करता ही हैं जैसे जो पढ़ने -लिखने में होशियार हैं, वह हमेशा पढ़ाई की ही बात करेगा, वैसे ही जो टैलेंट या सुख -सुविधा जिसके पास हैं वह उसकी बात करेगा ही, इसमें बुरा नहीं मानना चाहिए। यही सब कारण हैं की आप अपनी बराबरी के लोगो को Freinds बनाये।

अपने हम उम्र के लोगो को Freinds बनाये

आपने भी बहुत सारे लोगो को कहते सुना होगा की Freind तो कोई भी बन सकता हैं, पर ये बिलकुल सच नहीं है। Freind सिर्फ अपनी उम्र में बनाने से आपको अपनी सोच और विचार को नहीं बदलना होगा।

एक समान उम्र वाले लोगो की सोच काफी हद तक एक जैसी होती हैं , उनका रहन -सहन, उनकी बातें, उनके सपने, उनकी feelings, उनके experiences , जिसकी वजह से वो दोस्त बनते हैं। जब तक आपके विचार, आपकी सोच नहीं match होगा आप किसी को कैसे Freind बना सकते हैं।

आपसे बड़ी उम्र के लोग आपको गाइड या मिसगाइड कर सकते है, वह कभी भी आपके दोस्त नहीं बन सकते हैं, इसलिए दोस्ती अपनी हम उम्र में ही करे तो आपके लिए ज्यादा अच्छा होगा।

समान रूचि और विचार वाले लोगो से ही दोस्ती करे

आज दुनिया में हर व्यक्ति की choice है, कोई किसी के लिए compromise नहीं करना चाहता है , फिर चाहे दोस्ती में हो या किसी भी रिश्ते में हो, जैसे यदि आपको चाय पसंद हैं तो आप कॉफ़ी नहीं पीयेंगे, मतलब जो जिसको पसंद हैं वो वह करना चाहता हैं।

किसी भी रिश्ते को बनाये रखने के लिए आप अपने स्वभाव को सिर्फ उतना ही बदल सकते है जितना आसानी से possible हैं , आप अपने आप को पूरी तरह से बदल नहीं सकते हैं इसलिए ज्यादा अच्छा होगा की आप अपने type के लोगो से ही दोस्ती करे। बाद में कोई रिश्ता टूटे , इससे बेहतर हैं की आप पहले ही थोड़ा सोच समझ ले।

दोस्ती तभी होगी जब एक दूसरे से विचार मिलेंगे, एक कहावत भी सुनी होगी की एक दोस्त को देखकर, उससे बात करके आप दूसरे दोस्त के व्यवहार के बार में कुछ idea तो लगा ही सकते है जैसे जो ज्यादा हसने -बोलने वाले लोग होते है उनके दोस्त भी वैसे होते हैं और जो लोग थोड़ा कम बोलते हैं और रिज़र्व रहते है , उनके दोस्त भी वैसे ही बनते है।

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